बलिया: वो कहते हैं न कि जब इरादे नेक और मजबूत हों, तो हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हो, रास्ता जरूर मिल जाता है. हालांकि, घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाकर अपने और दूसरों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली महिलाएं भी साधारण नहीं होती हैं. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी उस महिला की है, जिसने गृहस्थी, मातृत्व और पढ़ाई, तीनों को संभालते हुए कानून की दुनिया में अपनी एक अलग ही पहचान बना ली है.
हम बात कर रहे हैं इंदौर की रहने वाली अदिति सिंह की, जो फिलहाल अपने पति सब रजिस्ट्रार बलिया विनय कुमार सिंह के साथ जनपद बलिया में रह रही हैं. यह एमएससी बायोटेक्नोलॉजी में स्नातकोत्तर हैं. उन्होंने शुरू की पढ़ाई इंदौर में पूरी कर विवाह के बाद प्रयागराज से एलएलबी किया. इसके बाद उन्होंने पीसीएस की तैयारी शुरू की. इसी दौरान जब उन्होंने लॉ एंड ऑर्डर और प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से समझा, तो उनके मन में कानून पढ़ने की इच्छा जगी. यही रुझान उन्हें एलएलबी तक ले आया. शादी के बाद पढ़ाई शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.
कभी कमजोर नहीं हुआ हौसला
एलएलबी के तीन सेमेस्टर पूरे हो चुके थे, तभी उनके जीवन में मातृत्व आया. बच्चे की देखभाल, घर की जिम्मेदारी और पढ़ाई यानी सब कुछ एक साथ निभाना किसी चुनौती से कम नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने समय निकालकर अपनी पढ़ाई जारी रखी. परीक्षा के दिनों में सुबह बलिया से निकलकर दो घंटे की यात्रा तय कर परीक्षा देने जाना और फिर लौटकर बच्चे की देखभाल करना बेहद थकाऊ और कठिन था, लेकिन उनका हौसला कभी कमजोर नहीं हुआ.
ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन में सफलता
इतनी मुश्किलों के बावजूद भी उन्होंने ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन में सफलता हासिल की. उनका कहना है कि इस परीक्षा में बेयर एक्ट की समझ और तार्किक सोच सबसे अहम होती है. प्रश्नों को ध्यान से पढ़कर सही निर्णय लेना ही सफलता की कुंजी बनता है. इस उपलब्धि पर उन्हें गर्व है, क्योंकि इससे उनके लिए वकालत का रास्ता खुला है.
इसके साथ ही अदिति सिंह ने कहा कि अब उनका सपना जज बनने का है, जिसे वह पूरा करके ही मानेंगी. उनका सपना है कि वे दबे-कुचले, गरीब और पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ें. उनकी कहानी हर उस महिला और युवा के लिए प्रेरणा है, जो कठिन हालात के बावजूद अपने सपनों को सच करना चाहता है.
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