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IAS Success Story: MP में खरगोन जिले की मनीषा धार्वे की कहानी मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है. सीमित संसाधनों के बीच पली-बढ़ी मनीषा ने अपने सपनों को पंख दिए और यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा पास कर न सिर्फ अपना सपना पूरा किया, बल्कि पूरे जिले और मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया. वह प्रदेश की पहली आदिवासी महिला IAS बनकर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं.
मनीषा धार्वे आज खरगोन जिले की सबसे चर्चित और सम्मानित फेमस पर्सनालिटी में शामिल हैं. उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों और लगातार मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. आदिवासी समुदाय से आने वाली IAS मनीषा ने अपने संघर्ष से नई पहचान बनाई है.

बता दें कि जिले के झिरनिया ब्लॉक के छोटे से गांव बोंदरान्या की रहने वाली मनीषा धार्वे का जन्म 30 जून 1999 को हुआ. 27 वर्षीय मनीषा जनजातीय समुदाय से आती हैं और अपने गांव की पहली ऐसी बेटी हैं, जिन्होंने UPSC जैसी कठिन परीक्षा को पास किया. उनकी इस उपलब्धि ने आदिवासी समाज में शिक्षा को लेकर नई उम्मीद जगाई है और युवाओं को आगे बढ़ने का हौसला दिया है.

मनीषा की इस सफलता में उनके परिवार की सबसे बड़ी भूमिका रही है. उनकी मां जमना धार्वे और पिता गंगाराम धार्वे दोनों सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं. पिता गंगाराम पहले इंदौर में इंजीनियर थे, लेकिन समाज के बच्चों को शिक्षित करने के उद्देश्य से उन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर शिक्षक बनना चुना.
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परिवार ने शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी. इसी सोच के चलते मनीषा और उनके भाई-बहन की पढ़ाई सरकारी स्कूलों में ही करवाई गई. मनीषा घर की बड़ी बेटी हैं और उनके छोटे भाई का नाम विकास धार्वे है. सादा जीवन और शिक्षा के संस्कारों ने मनीषा को मजबूत आधार दिया.

मनीषा की शुरुआती शिक्षा गांव की आंगनबाड़ी से हुई. इसके बाद उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल से पूरी की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने इंदौर के होलकर कॉलेज से बीएससी कंप्यूटर साइंस की डिग्री हासिल की, यहीं से उनके जीवन को एक नई दिशा मिली.

कॉलेज के दौरान दोस्तों ने उनके टेलेंट को पहचाना और उन्हीं के सुझाव पर मनीषा ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की. हालांकि, यह राह आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. लगातार प्रयासों और कठिन मेहनत के बाद वर्ष 2023 में उनके चौथे प्रयास में सफलता मिली और उन्हें UPSC में 257वीं रैंक प्राप्त हुई.

मनीषा का मानना है कि जब सरकार की योजनाएं गांव तक सही तरीके से पहुंचती हैं, तो लोगों का जीवन बदल सकता है. उन्होंने खुद सरकारी योजनाओं का लाभ पाया, जिसने उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया. इसी अनुभव के आधार पर वह भविष्य में ग्रामीण विकास पर विशेष फोकस करना चाहती हैं.

आंगनबाड़ी से IAS बनने तक का मनीषा धार्वे का सफर आज सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा से कम नहीं है. कई युवाओं ने उनसे प्रेरणा लेकर अपने इरादों को मजबूत किया है. फिलहाल, मनीषा बतौर प्रशिक्षु उत्तर प्रदेश में विभिन्न विभागों में ट्रेनिंग ले रही हैं.
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