UP News: उत्तर प्रदेश अब “बीमारू राज्य” की छवि को पीछे छोड़कर देश के “ग्रोथ इंजन” के रूप में उभर रहा है. उत्तर प्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (UPGIS) ने राज्य की इस आर्थिक कायाकल्प में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोजित इस शिखर सम्मेलन ने न केवल भारी-भरकम निवेश के प्रस्तावों को आकर्षित किया है, बल्कि निवेशकों के मन में उत्तर प्रदेश के प्रति विश्वास भी पैदा किया है.
निवेश के आंकड़ों ने रचा इतिहास
2023 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में उत्तर प्रदेश ने करीब ₹33.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव (MoUs) प्राप्त कर दुनिया को चौंका दिया था. ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, यह आंकड़ा अब बढ़कर ₹40 लाख करोड़ से भी ऊपर निकल गया है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार केवल कागजों पर समझौते नहीं कर रही, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने के लिए “ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी” (GBC) का आयोजन कर रही है. अब तक ₹15 लाख करोड़ से अधिक का निवेश जमीन पर उतारा जा चुका है, जो राज्य में औद्योगिक विकास की नई इबारत लिख रहा है.
निवेश के प्रमुख केंद्र और क्षेत्र
उत्तर प्रदेश ने अपनी नीतियों में बदलाव कर निवेशकों के लिए “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” को प्राथमिकता दी है.
नवीकरणीय ऊर्जा: इस सेक्टर को सबसे अधिक निवेश मिला है, जिसमें सोलर एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन पर विशेष फोकस है.
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी: नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र देश के “मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब” बन चुके हैं. देश के कुल मोबाइल उत्पादन का करीब 60% हिस्सा अकेले यूपी से आता है.
डिफेंस कॉरिडोर: झांसी, कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों में बन रहे डिफेंस कॉरिडोर ने वैश्विक रक्षा कंपनियों को आकर्षित किया है.
इंफ्रास्ट्रक्चर: यूपी अब “एक्सप्रेसवे प्रदेश” बन गया है. बेहतर कनेक्टिविटी और 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों ने लॉजिस्टिक्स की लागत कम की है.
रोजगार के खुलते अवसर
इन निवेशों का सबसे बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश के युवाओं को मिल रहा है. अनुमानों के मुताबिक, इन परियोजनाओं से 90 लाख से 1.10 करोड़ नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे. इससे न केवल स्थानीय पलायन रुकेगा, बल्कि यूपी $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ेगा.
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