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Delhi Success Story: दिल्ली की रहने वाली नूपुर जैन ने समाज और परिवार के विरोध के बावजूद इंडियन एयर फोर्स जॉइन किया. उन्होंने 21 साल की उम्र में अपने परिवार से सेना की नौकरी कर इतिहास रच दिया. शादी नहीं होगी? समाज क्या कहेगा? जैन धर्म में फौज नहीं जाते, जैसे ताने सुने. इसके बाद भी उन्होंने सफलता हासिल की.
नई दिल्ली : जैन धर्म के लोग फौज में नहीं जाते हैं. तुम लड़की हो फौज में कैसे जा सकती हो. रिश्तेदार पूछेंगे तो क्या बताएंगे कि बेटी को फौज में भेज दिया है, समाज के चार लोग क्या कहेंगे. अब तुम्हारी शादी नहीं हो पाएगी. फौज में जाने का काम बेटियों का नहीं बेटों का होता है. इन सारी बातों को दरकिनार कर दिल्ली की नूपुर जैन ने अपने सपनों को चुना. यह कहानी है उस लड़की की, जिसने बचपन से ही घर और स्कूल में हमेशा लड़का-लड़की का भेदभाव देखा था. इसीलिए उन्होंने स्कूल के समय पर ही एनसीसी जॉइन कर लिया. एनसीसी जॉइन करने के बाद इंडियन एयर फोर्स में गई और स्क्वाड्रन लीडर बन गईं. इसके बाद जो लोग ताने मारते थे. वही लोग आज नूपुर का हर जगह सम्मान करने लगे हैं. हम बात कर रहे हैं नूपुर जैन की, जिन्होंने सिर्फ 21 साल की उम्र में इंडियन एयर फोर्स जॉइन कर लिया था और 13 साल की उम्र में पहली बार असली बंदूक से गोली चलाई थी.
NCC से जागा नूपुर का जज्बा
नूपुर जैन से लोकल 18 की टीम ने खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि वह दिल्ली की रहने वाली हैं. लाजपत नगर में उनका घर था. लेडी इरविन स्कूल से उन्होंने नर्सरी से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई की और क्लास 8 में ही उन्होंने एनसीसी जॉइन कर लिया था. एनसीसी की वर्दी पहनने के बाद उन्हें एक जिम्मेदारी का एहसास हुआ. उन्होंने बताया कि उन्होंने 13 साल की उम्र में पहली बार फायरिंग कैंप में असली बंदूक से गोली चलाई थी. यह कैंप हरियाणा में था.
नूपुर ने बताया कि जब वह स्कूल और घर में होती थी तो उन्हें सिलाई, कढ़ाई और कुकिंग सिखाया जाता था. कहा जाता था तुम लड़की हो तुम्हारे यही काम आएगा, लेकिन जब एनसीसी में जाती थी और वर्दी पहनती थी तो वहां पर लड़का-लड़की का भेदभाव खत्म हो जाता था. यहीं से इन्होंने तय किया कि जहां पर दुनिया लड़का और लड़की के भेदभाव पर खत्म हो जाती है. वहां से इन्हें अपनी दुनिया शुरू करनी है. क्योंकि एनसीसी ने इन्हें जोखिम लेना सिखाया था और अनुशासन में रहने के साथ ही टीमवर्क और आत्मविश्वास जगाया था.
नूपुर के परिवार ने किया था विरोध
नूपुर जैन ने बताया कि 12वीं के बाद उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और साथ ही साथ एयर फोर्स का फॉर्म भर दिया था. इसके अलावा सीडीएस के जरिए नेवी का भी फॉर्म भर दिया था. दोनों में सिलेक्शन हो गया था, लेकिन इन्होंने इंडियन एयर फोर्स को चुना. क्योंकि इंडियन एयर फोर्स बहुत अलग है. जनवरी 2012 में उनकी ट्रेनिंग इंडियन एयर फोर्स में शुरू हो चुकी थी और दिसंबर 2012 में ट्रेनिंग खत्म हुई थी. फॉर्म भरने तक परिवार में किसी को नहीं पता था कि वह इंडियन एयर फोर्स की तैयारी कर रही हैं.
विंग कमांडर से ही रचाई शादी
हालांकि जब रिजल्ट आया और इनका सिलेक्शन हो गया तो परिवार का कड़ा विरोध इन्होंने झेला. क्योंकि पिता बैंक में थे. मां टीचर थी. बहन भी टीचर रही. ऐसे में सबका यही कहना था की जैन धर्म के लोग फौज में नहीं जाते हैं. अब जैन धर्म में तुम्हारी शादी नहीं हो पाएगी. रिश्तेदार कहेंगे की बेटी को फौज में क्यों भेजा. अब उसे नॉनवेज खाना पड़ेगा. सिगरेट पीनी पड़ेगी. रात में ड्यूटी करनी पड़ेगी. इतने सारे लोगों के सवाल थे, लेकिन सभी सवालों को इन्होंने दरकिनार कर अपने सपनों को चुना और कहा कि अगर जैन धर्म में कोई मिलेगा तो शादी कर लेंगी और अगर नहीं मिलेगा तो कभी शादी नहीं करेंगी, लेकिन इंडियन एयर फोर्स के दौरान ही इन्हें कुलदीप जैन मिले. जो कि इंडियन एयर फोर्स में ही विंग कमांडर हैं. उनके साथ ही उन्होंने शादी की और फिलहाल वह खुश हैं.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें
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